पैग़म्बर का दर्द: ईमान

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पैग़म्बर का दर्द: ईमान

एम. फ़ेतुल्लाह गुलेन · ख़ुतबा · 14 फ़रवरी 1975 · "तौहीद के प्रमाण" शृंखला का पहला ख़ुतबा

हर इंसान का एक बड़ा मसला होता है, जो उसे उलझाए रखता है और दूसरी चीज़ों को भुला देता है। होजाएफ़ेंदी इस ख़ुतबे में पूछते हैं: किसी इंसान या किसी क़ौम का सबसे बड़ा मसला क्या होना चाहिए, और इसे कौन तय करेगा?

यह लेख ऊपर दिए वीडियो के साथ-साथ, खंड-दर-खंड चलता है। कथन ख़ुतबे जैसा ही है; तालिकाएँ, अवधारणाएँ और स्रोत-टिप्पणियाँ खुलने वाले बक्सों में हैं।

I — हर इंसान का एक बड़ा मसला होता है

बड़ा मसला छोटे मसलों को भुला देता है

हर इंसान का एक बड़ा मसला होता है, जो उसे व्यस्त रखता है, व्यथित करता है और बहुत बार उसकी दुनिया से जुड़ी दूसरी चीज़ों को भुला देता है। मसला जितना बड़ा होता जाता है, उस मसले से बाहर की चीज़ें उतनी ही पूरी तरह भुला दी जाती हैं और छोड़ दी जाती हैं।

जिस इंसान के सामने अपना पैर खो देने का मसला खड़ा हो, उसका उस दिन बने खानों की क़िस्मों पर बातें करना सोचा भी नहीं जा सकता। जिसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई हो और यह पता न हो कि कहाँ गई, वह आदमी भी उस दिन अपने जूतों पर पॉलिश करने को मसला नहीं बनाता।

📖 📊 वीडियो से: बड़ा मसला छोटे मसलों को भुला देता है (लेबल तुर्की में)
Her insanın büyük bir meselesi vardırOnu meşgul eden, müteessir eden, başka şeyleri unutturan unutulur, terk edilirBüyükmesele Bacağını kaybetme meselesiO gün çıkan yemeklerin çeşididedikodu edilemez. Hanımı gitmiş, nerede bilinmiyorO gün ayakkabısına boya vurmayımesele etmez.Mesele büyüdükçe kendinden başkaher şey unutulur ve terk edilir.

II — मसले को कौन तय करेगा?

पैमाना: अल्लाह के पैमाने, ज़मीर और बुद्धि

होजाएफ़ेंदी पूछते हैं: हमारे जीवन और रहन-सहन से जुड़े मसलों से बाहर के बड़े कामों के बड़े होने को हम कैसे समझेंगे? जवाब यह है: इसे हम अल्लाह (उसकी महिमा ऊँची हो) के पैमानों के भीतर, ज़मीर और इंसानी करुणा की रोशनी में, बुद्धि और तर्क से खोजेंगे।

हर दौर में कुछ मसले अहमियत पा लेते हैं। किसी समय जंगें, दुनिया को जीत लेना, सभ्यताएँ और आबादियाँ खड़ी करना अहमियत पा लेता है। कभी लोगों को वह पक्का यक़ीन दिलाना, जिसके वे मोहताज हैं; ईमान; लोगों को अपनी ही इच्छाओं के अनुसार जीने से बचाया जाना; और अल्लाह की चाहतों को जीना और जिलाना अहमियत पा लेता है। यह उन साफ़ मसलों में से है, जिन्हें बुद्धि की रहनुमाई में ज़मीर रखने वाला हर इंसान महसूस कर सकता है।

📖 📊 वीडियो से: पैमाना: अल्लाह के पैमाने, ज़मीर और बुद्धि (लेबल तुर्की में)
Her devirde bir mesele öne çıkarResûl-i Ekrem (s.a.v.) devrinde de bir mesele ehemmiyet kazanmıştıBir zaman gelir ki… HarplerCihanı fethetmeMedeniyetler, ümranlar kurmaBazı zaman da olur ki… Sağlam bir kanaat kazandırmaİmanİnsanların kendi arzularınıyaşamalarından kurtarılmasıAllah’ın istekleriniyaşama ve yaşatmaAklın rehberliğiyle vicdan taşıyan her insanınhemen hissedebileceği açık bir mesele.

III — ज़मीर की कसौटी

जो व्यथित नहीं होता, वह न दिल रखता है, न ज़मीर

पटरी से उतरी हुई पीढ़ी के सामने जो इंसान व्यथित नहीं होता, इसका मतलब है कि वह न दिल रखता है, न ज़मीर। जिसकी संतान या कोई क़रीबी बेदीन हो गया हो, वह अगर इस मसले पर व्यथित नहीं है, तो इसका मतलब है कि उसने अपनी इंसानी क्षमताएँ खो दी हैं। किसी क़ौम में बिखराव, टूटन और बेलगाम जीवन में जा पड़ने का सिलसिला एक-दूसरे के पीछे चल रहा हो और क़ौम संवेदनहीन और बेपरवाह खड़ी रहे, तो उस क़ौम के सीने में दिल और ज़मीर होने का दावा नहीं किया जा सकता।

दिल और ज़मीर रखने वाले हर इंसान के दिल में — दीन से कटने वाले, ईमान से जुदा होने वाले, नैतिकता और सदाचार छोड़ने वाले हर व्यक्ति को देखकर — लहर-दर-लहर व्यथा उठना लाज़िम है। अगर नहीं उठती, तो हम कहेंगे: "उसके पास दिल नहीं है, ज़मीर भी नहीं है।" जो बहुत छोटे मसलों पर व्यथित हो जाता है और इस मसले पर व्यथित नहीं होता, इसका मतलब है कि उसे ईमानहीनता के अंजाम के बारे में शक है।

📖 तीन स्थितियाँ, एक ही निदान
पटरी से उतरी हुई पीढ़ीजो इसके सामने व्यथित नहीं होता: इसका मतलब है कि वह न दिल रखता है, न ज़मीर।
जिसकी संतान या क़रीबी बेदीन हो गया होइसके बावजूद जो व्यथित नहीं होता: इसका मतलब है कि उसने अपनी इंसानी क्षमताएँ खो दी हैं।
बिखरती, बेलगाम क़ौमजो क़ौम इसके सामने संवेदनहीन और बेपरवाह खड़ी रहती है: उसके दिल और ज़मीर रखने का दावा नहीं किया जा सकता।
📖 📊 वीडियो से: जो व्यथित नहीं होता, वह न दिल रखता है, न ज़मीर (लेबल तुर्की में)
Kalp ve vicdan taşıyor mu?Müteessir olmayanın hâli Şirazeden çıkmış bir nesil karşısındamüteessir olmayan insankalp ve vicdantaşımıyor demektir Evladı ya da yakını dinsiz olmuş,buna rağmen müteessir olmayaninsanî melekelerinikaybetmiş demektir Çözülmeler, kopmalar, başıboşluk karşısındahissiz ve kayıtsız duran bir milletkalbinde kalp ve vicdantaşıdığı iddia edilemez

IV — असल निदान

इस राह के अंजाम पर शक

इन ढहने, बिखरने और मिट जाने के सामने जो इंसान व्यथित नहीं होता, इसका मतलब है कि उसे इस राह के अंजाम के बारे में शक है: वह किसी हश्र में विश्वास नहीं रखता, किसी हिसाब में विश्वास नहीं रखता, अल्लाह के सामने खड़े होने में विश्वास नहीं रखता, किसी अनंत सुख में विश्वास नहीं रखता।

अपनी संतान के पटरी से उतर जाने पर जो भावुक नहीं होता, वह इस विषय में जो भी दलीलें लाए, वे सब पीछे फेंक दी जाएँगी। क्योंकि इस मसले में ईमान रखने की, उस काम से दिल से जुड़े होने की सबसे पहली ज़ाहिर और रोशन निशानी, उसे उस भँवर से निकालने के लिए दिखाई जाने वाली कोशिश है। होजाएफ़ेंदी अल्लाह तआला से दुआ करते हैं कि वह हमें इस बड़े मसले को उसके मूल्य के अनुरूप समझ पाने की तौफ़ीक़ दे।

📖 📊 वीडियो से: इस राह के अंजाम पर शक (लेबल तुर्की में)
Asıl teşhis: gidişin akıbetinden şüpheYıkılışlar, çözülüşler, yok oluşlar karşısında müteessir olmayan…yüzeyde: müteessir olmamakkökte: bu gidişin akıbeti hakkında şüphe Bir haşreinanmıyor Bir hesabainanmıyor Allah’ın huzurunaçıkışa inanmıyorEbedî saadeteinanmıyorBu gidişin akıbeti hakkında şüphesi var demektir.

V — पैग़म्बर का मसला

"मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!"

रसूल-ए-अकरम (सल्ल.) ने जीवन में आँखें खोलकर, जीवन का अर्थ समझने के क्षण से ही इसी दर्द को अपना दर्द बना लिया, इसी मसले को सबसे बड़ा मसला बना लिया। उन्होंने अपनी दौलत भी और अपनी पत्नी की दौलत भी इसी मसले पर क़ुर्बान कर दी; अपने मसले की वजह से उन्हें चैन नसीब नहीं हुआ।

"तुम्हारा सिर फूट गया", वे कहते थे: "मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!" "तुम्हारा दाँत टूट गया": "मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!" उन्हें वतन छोड़ने पर मजबूर किया गया, हिजरत का आदेश दिया गया: "मेरा मसला बड़ा है!" कहते थे। यह मसला उनका दम घोंटने की हद तक पहुँच गया था कि क़ुरआन ने फ़रमाया: "क़रीब है कि तुम अपनी जान दे दोगे, इस कारण कि वे ईमान नहीं लाते" (अश-शुअरा 26:3)। होजाएफ़ेंदी कहते हैं: "यह है ईमान वाले दिल की अभिव्यक्ति, यह है ज़मीर वाले दिल की अभिव्यक्ति।"

📖 पैग़म्बर का जवाब हमेशा एक ही था
"तुम्हारा सिर फूट गया""मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!"
"तुम्हारा दाँत टूट गया""मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!"
"तुम्हें वतन छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है; तुम्हें हिजरत का आदेश दिया गया है""मेरा मसला बड़ा है!"
📖 📊 वीडियो से: "मुझे नहीं पता, मेरा मसला बड़ा है!" (लेबल तुर्की में)
Peygamber’in (s.a.v.) meselesiHayatın manasını anladığı andan itibaren en büyük mesele: iman Kendi servetini feda etti Hanımının servetini de feda etti Rahat yüzü görmediBaşın kırıldı, diyorlardı…Bilmiyorum, meselem büyük!Dişin kırıldı!Bilmiyorum, meselem büyük!Memleketini terk etmeye zorlanıyor;hicrete memur edildin!Meselem büyük!Daima kafasında meselesi vardı
Bu mesele onu boğacak hâle getirmiştiلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَNeredeyse kendini intihar edeceksin,iman etmediklerinden ötürü!Şuarâ Sûresi, 26:3İşte imanlı kalbin ifadesiİşte vicdanlı kalbin ifadesi

VI — अबू तालिब

चालीस साल की हिफ़ाज़त और आख़िरी साँस

अबू तालिब ने लगभग चालीस साल रसूलों के रसूल की सेवा की थी, उन्हें अपनी हिफ़ाज़त में रखा था, बहती हवा से भी बचाया था। पर वे यह उनकी पैग़म्बरी की वजह से नहीं, रिश्तेदारी की भावना और स्नेह से करते थे। अगर वे यह उनकी पैग़म्बरी के सम्मान में करते, तो दिल की बर्फ़ पिघल जाती और वे रसूलुल्लाह के दरिया में घुलकर बह जाते। अल्लाह के रसूल ने इस हिफ़ाज़त का एहसान चुकाने के लिए उनसे कुछ माँगा: "मेरे चाचा! मैं तुमसे ज़्यादा कुछ नहीं माँगता, एक बार 'ला इलाहा इल्लल्लाह' (अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं) कह दो, मैं महा-अदालत में तुम्हारी शफ़ाअत (सिफ़ारिश) करूँ!"

अबू तालिब असमंजस में थे; क्योंकि अल्लाह के रसूल से हम सीखते हैं कि "जैसे जियोगे वैसे मरोगे, जैसे मरोगे वैसे ही हश्र में उठोगे"। अबू तालिब 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहते हुए जिए ही नहीं थे कि वैसे मरें। उनके सिरहाने क़ुरैश के सरदार और अज्ञान तथा कुफ़्र का बाप अबू जहल मौजूद था; अल्लाह के रसूल उनसे "कहो!" कह रहे थे और अबू जहल कह रहा था: "क्या अपने माँ-बाप के दीन से फिर रहे हो?" पूर्वाग्रहों में धँसा इंसान क़ायल नहीं किया जा सकता। मोमिन का आख़िरी बोल 'ला इलाहा इल्लल्लाह' होता है; अबू तालिब का आख़िरी बोल "मैं अब्दुल मुत्तलिब के दीन पर मर रहा हूँ" रहा।

अल्लाह के रसूल उसी क्षण टूट गए; मानो जिस इमारत में थे, उसका गुंबद उनके सिर पर आ गिरा। चालीस साल वह नूर को अपनी पनाह में ले, उसके लिए मुसीबत से मुसीबत में, मौत से मौत की गोद में जा पड़े; फिर अल्लाह के रसूल उसके लिए कुछ भी न कर सकें, वह शफ़ाअत का हक़ तक खोकर आख़िरत को चला जाए। अल्लाह के रसूल टूट गए।

📖 दो आख़िरी बोल
मोमिन का आख़िरी बोलला इलाहा इल्लल्लाह
अबू तालिब का आख़िरी बोल"मैं अब्दुल मुत्तलिब के दीन पर मर रहा हूँ।"
📖 📊 वीडियो से: चालीस साल की हिफ़ाज़त और आख़िरी साँस (लेबल तुर्की में)
Ebû Talib: kırk yıllık himayePeygamber’i (s.a.v.) esen yelden koruyan amca≈ 40 yılhizmet etti, himaye etti, esen yelden koruduPeygamberliğinden ötürü değilPeygamberliğine hürmetle yapsaydı,kalpteki buzlar çözülür, o daResûlullah deryasında erirdi.Hiss-i karabetle, şefkatleSadece yakınlık hissi veşefkatle yapıyordu bunu.Amcam! Senden fazla bir şey istemiyorum:bir kere “Lâ ilâhe illallâh” de,لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُmahkeme-i kübrâda sana şefaat edeyim!Not: Buhârî ve Müsned’de “ehâccu leke bihâ” (lehinde hüccet getireyim); “şefaat” lafzı Hâkim, el-Müstedrek’te.
İkna edilemediPeşin hükümlere saplanan insan ikna edilemezMüminin son sözüلَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُLâ ilâhe illallâhEbû Talib’in son sözü“Abdülmuttalib’in diniüzerine ölüyorum.”Abdülmuttalib de nasıl öldü, cahiliye devrinde malum!

VII — तसल्ली

"तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते"

उसी क्षण अल्लाह के रसूल के होंठों से ये शब्द निकले: "जब तक रोका न जाऊँ, अल्लाह की क़सम, तुम्हारे लिए हमेशा इस्तिग़फ़ार करूँगा।" "अगर अल्लाह मुझे रोक देगा, तो क्या करूँ, हुक्म ऊँचे दरबार से है: कमर झुकाऊँगा, गर्दन झुका दूँगा।" तुरंत आयत उतरी: पैग़म्बर और मोमिन, चाहे वे उनके अपने क़रीबी ही क्यों न हों, मुशरिक़ के रूप में मरने वालों के लिए कभी और किसी हाल में इस्तिग़फ़ार नहीं कर सकते, उनके लिए मग़फ़िरत नहीं माँग सकते (अत-तौबा 9:113)।

यह ऊँचे दरबार से एक तसल्ली है (अल-क़सस 28:56): "मेरे गौरवशाली हबीब! तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते! अल्लाह जिसे चाहता है, उसे हिदायत देता है।" अल्लाह की इच्छा नहीं हुई; उसने अल्लाह की ओर रुख़ ही नहीं किया कि अल्लाह भी उसकी हिदायत चाहे। "तो तुम बिल्कुल भी व्यथित मत हो! तुम्हारा पवित्र हृदय दुखी न हो; भले वह तुम्हारा रिश्तेदार हो, तुम्हारे अपने वे हैं जो तक़वा में तुम्हारे क़रीब हैं, जो अल्लाह की निकटता में तुम्हारे क़रीब हैं।"

तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते! अल्लाह जिसे चाहता है, उसे हिदायत देता है।

📖 📊 वीडियो से: "तुम जिसे चाहो उसे हिदायत नहीं दे सकते" (लेबल तुर्की में)
Anında âyet iniyorمَا كَانَ لِلنَّبِيِّ وَالَّذِينَ آمَنُواأَنْ يَسْتَغْفِرُوا لِلْمُشْرِكِينَ وَلَوْ كَانُوا أُولِي قُرْبَىٰمِنْ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمْ أَنَّهُمْ أَصْحَابُ الْجَحِيمِPeygamber ve müminler, kendi yakınları dahi olsa,müşrik olarak ölen kimselere asla istiğfar edemezler;onlar için mağfiret talep edemezler.Tevbe Sûresi, 9:113Müşrik olarak ölenler için istiğfar edilemezOnlar için mağfiret talep edilemez
Büyük yerden bir teselliإِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَوَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَنْ يَشَاءُSen istediğini hidayet edemezsin!Allah kimi dilerse ona hidayet eder.Kasas Sûresi, 28:56Murad-ı ilâhî olmadı:o, Allah’a yönelmedi ki Allah dahidayetini murad buyursun.Öyleyse sen hiç müteessir olma,kalb-i pâkin mahzun olmasın.Yakının dahi olsa, senin yakınıntakvada, Allah’a yakınlıkta sana yakın olanlardır.

VIII — हज़ार इंसान, एक दर्द

बड़ा मसला: अल्लाह के बारे में बताना

मोमिन को घुटन देने वाली, मोमिन को पीड़ा में डालने वाली बात यह है कि कोई इंसान बेदीन हो जाए। और अगर हर दिन हज़ार इंसान बेदीन हो रहे हों! अगर हर दिन हज़ार जनाज़े अपना ईमान खो रहे हों! अगर हज़ारों इंसान दीन से कटकर जा रहे हों! इस बड़े मंज़र के सामने जो इंसान व्यथित नहीं होता, इसका मतलब है कि वह न दिल रखता है, न ज़मीर।

इंसान अपने ईमान और अपनी समझ के अनुपात में जिस बड़े मक़सद को जानता है, उसे दूसरों को बताने की कोशिश करेगा: उसका बड़ा मसला अल्लाह के बारे में बताना है। जो इंसान किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ जाता है, वह गाँव-गाँव, क़स्बे-क़स्बे घूमकर अपने नेता के बारे में बताता है; चाहे वह फ़लाँ हो या ढिमकाना। क्या आपकी नज़र में अल्लाह की, रसूलुल्लाह की क़दर पार्टी के नेता जितनी भी नहीं? अगर आप गाँव-गाँव, क़स्बे-क़स्बे घूमकर अपने अल्लाह के बारे में नहीं बताते; अल्लाह के बारे में न बताए जाने के कारण पटरी से उतरती जवानी को देखकर आपका दिल व्यथित नहीं होता, तो इसका मतलब है कि हम बिगड़ चुके हैं, हममें सड़न आ चुकी है।

📖 📊 वीडियो से: बड़ा मसला: अल्लाह के बारे में बताना (लेबल तुर्की में)
Mümini muzdarip eden şeyBir insanın dinsiz olması… ya bin insan her gün?Ya bin insan her gün dinsiz oluyorsa!Ya bin cenaze her gün imanını kaybediyorsa!Ya binlerce insan dinden kopup gidiyorsa!Bu büyük manzara karşısında müteessir olmayan insankalp de vicdan da taşımıyor demektir.
Büyük mesele: Allah’ı anlatmakİnsan, imanının ve izanının ölçüsünde bildiği büyük davayı anlatırMüminin büyük meselesi Allah’ı ve Resûlullah’ıanlatmak Siyasi partiye angaje olan insanKöy köy, kasaba kasaba dolaşıyor,Lideri Ali de olsa, Veli de olsaonu anlatıyor.Partinin lideri kadar Allah’ın sizin yanınızda kıymeti yok mu?Resûlullah’ın partinizin lideri kadar kıymeti yok mu diyorum size!Köy köy, kasaba kasaba gezip Allah’ınızı anlatmıyorsanız,Allah anlatılmadığı için şirazeden çıkan gençlik karşısında kalbiniz müteessir olmuyorsa:bozulmuşuz, tefessüh etmişiz demektir.

IX — दर्द और मक़सद

पैग़म्बर के दर्द और मक़सद को अपना दर्द और मक़सद बना लीजिए

होजाएफ़ेंदी दुआ करते हैं: अल्लाह हमें बड़ी हक़ीक़त को समझने की तौफ़ीक़ दे; अल्लाह अपनी कृपा और करम से, बिना किसी मोल के हमें बख़्श दे, सीधे रास्ते की हिदायत दे। यह क़ौम अभी कितने और दिन मुँह के बल रेंगती रहेगी, अल्लाह ही जाने; अल्लाह की ओर लौटने के क्षण तक ऐसा ही रहेगा, यह पक्का है।

अल्लाह के रसूल का दर्द और मक़सद यही था। हमारे पैग़म्बर के दर्द और मक़सद को अपना दर्द और मक़सद बना लीजिए; अल्लाह की चाहत यही है। अपने दिल से जिएँ, अपने ज़मीर से जिएँ; दिल और ज़मीर की रोशनी में जो फ़ैसले करने हैं, वे करें।

📖 📊 वीडियो से: पैग़म्बर के दर्द और मक़सद को अपना दर्द और मक़सद बना लीजिए (लेबल तुर्की में)
Allah Resûlü’nün derdi davasıPeygamberimizin dert ve davasınıdert ve dava edinin.Allah’ın isteği budur: Allah’ın isteğini dert ve dava edinin.Kalbinizle yaşayın Vicdanınızla yaşayın Kararlarınızı kalp vevicdanın ışığında verin

X — हज़रत अली और ख़ैबर

"जो लोग तुम्हारे सामने आएँ, उन्हें अल्लाह के बारे में बताओ!"

हज़रत अली (अल्लाह उनसे राज़ी हो) को अल्लाह के रसूल ने ख़ैबर की फ़तह पर नियुक्त किया था। जब ख़ैबर जीता न जा सका, तो अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया: "कल मैं यह झंडा ऐसे व्यक्ति को दूँगा जो अल्लाह और रसूलुल्लाह से प्रेम करता है, और अल्लाह और उसके रसूल भी उससे प्रेम करते हैं।" उस रात हर कोई इस इंतज़ार में था कि अगले दिन झंडा उसे दिया जाएगा: उमर भी इंतज़ार में थे, अबू बक्र भी, उस्मान भी (अल्लाह उन सबसे राज़ी हो)।

जिनकी आँखों में दर्द था, आँखों में रोग था, वे हज़रत अली हमारे आक़ा की ख़िदमत में पहुँचे तो आँखों पर लगा दिया, वे शिफ़ायाब हो गए। जब झंडा उन्हें दिया गया, तब यह देखा गया कि अल्लाह और उसके रसूल का प्रिय कौन है। "जैसे हो वैसे ही चल पड़ो! फिर जहाँ जाओ वहाँ अल्लाह के बारे में बताओ! जो लोग तुम्हारे सामने आएँ, उन्हें अल्लाह के बारे में बताओ!"

📖 📊 वीडियो से: "जो लोग तुम्हारे सामने आएँ, उन्हें अल्लाह के बारे में बताओ!" (लेबल तुर्की में)
Hz. Ali (r.a.) ve HayberFetih emri ve bayrakHayber’in fethine memur edildiHayber fethedilemeyince ferman ettiلَأُعْطِيَنَّ الرَّايَةَ غَدًا رَجُلًايُحِبُّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيُحِبُّهُ اللَّهُ وَرَسُولُهُYarın bu bayrağı öyle birisine vereceğim kio Allah’ı ve Resûlullah’ı sever,Allah ve Resûlü de onu sever.Not: Buhârî, Sahîh (Sehl b. Sa’d rivayeti)

XI — एक मोमिन का सबसे अहम मसला

एक आदमी की हिदायत

"तुम्हारे हाथ से किसी एक आदमी का हिदायत पा जाना, तुम्हारे लिए, अल्लाह की दी हुई ढेर-ढेर दौलत, ऊँटों और भेड़ों से कहीं बेहतर है।" एक आदमी की हिदायत का ज़रिया बनना, इस क़ौम के किसी एक अकेले व्यक्ति का ईमान, इस पूरे देश के मर जाने से ज़्यादा अहम है। इज़मिर का भूकंप से धरती की तह में समा जाना, किसी एक इंसान के ईमान से निकल जाने के सामने बहुत हल्का पड़ता है; क्योंकि मरने वाले लोग, अगर उन्होंने अल्लाह की रज़ा पा ली है, तो जन्नत में जाते हैं। पर उसका क्या, जो हमेशा के लिए जहन्नम में जा पड़ा, हमेशा के लिए अल्लाह को खो बैठा, हमेशा के लिए क़ुरआन को खो बैठा!

इसीलिए एक मोमिन का सबसे अहम मसला अल्लाह के बारे में बताना, रसूलुल्लाह के बारे में बताना है। आप ख़तीब को अपनी आवाज़ देंगे, नसीहत करने वाले को अपनी आवाज़ देंगे; वह जो कहेगा वही कहेंगे, वह जो फैलाएगा वही फैलाएँगे। बड़ी हक़ीक़त में साझीदार बनेंगे; ताकि साथ-साथ वैसे ही जिएँ, साथ-साथ वैसे ही हश्र में उठें।

एक मोमिन का सबसे अहम मसला अल्लाह के बारे में बताना, रसूलुल्लाह के बारे में बताना है।

📖 📊 वीडियो से: एक आदमी की हिदायत (लेबल तुर्की में)
Bir adamın hidayetiSenin elinle hidayete eren bir kişiAllah’ın verdiği yığın yığınmallar, develer, koyunlarSenin elinle hidayeteeren bir adamDaha hayırlıdır
Bir tek ferdin imanıbu memleketin topyekün ölmesinden daha mühimdirİzmir’in zelzele olupyerin dibine batmasıbir tek insanın imandan çıkmasıkarşısında çok hafif kalır.Ölenler, Allah’ın rızasını kazandılarsacennete giderler.Ya ebediyyen cehenneme düçar olan,ebediyyen Allah’ı kaybeden,ebediyyen Kur’an’ı kaybeden!

अवधारणाएँ

📖 ख़ुतबे में आई अवधारणाएँ

व्यथित: दुखी होने वाला, प्रभावित होने वाला।

अहमियत: महत्व।

पटरी से उतरना: व्यवस्था से बाहर हो जाना, बेलगाम हो जाना।

इज़आन: समझ, बोध।

रिश्तेदारी की भावना: नज़दीकी का एहसास, रिश्तेदारी का भाव।

महा-अदालत: बड़ी अदालत; क़यामत का दिन।

सड़न आना: बिगड़ना, गल-सड़ जाना।

इस्तिग़फ़ार: अल्लाह से क्षमा माँगना।

स्रोत

📖 ख़ुतबे के स्रोत

ऑडियो रिकॉर्डिंग: Çınar Media (YouTube)

आयतें: अश-शुअरा 26:3 · अत-तौबा 9:113 · अल-क़सस 28:56

हदीसें: बुख़ारी, अहमद बिन हंबल (मुसनद), हाकिम (अल-मुस्तदरक): अबू तालिब की वफ़ात · बुख़ारी: ख़ैबर · मुस्लिम: "हर बंदा उसी हाल में उठाया जाएगा, जिस हाल में उसकी मृत्यु हुई"

📖 स्रोत टिप्पणी: हदीसें और रिवायतें

अबू तालिब की वफ़ात का प्रसंग बुख़ारी, अहमद बिन हंबल की मुसनद और हाकिम की अल-मुस्तदरक में आता है। "शफ़ाअत" शब्द हाकिम की रिवायत में है; बुख़ारी और मुसनद में वाक्य "तुम्हारे पक्ष में दलील पेश करूँ" (अहाज्जु लका बिहा) के रूप में है। मुसनद के अनुसार इसी घटना पर अत-तौबा 9:113 और अल-क़सस 28:56 उतरीं।

ख़ैबर की हदीस बुख़ारी में सहल बिन सअद से रिवायत की गई है। ख़तीब द्वारा पढ़ा गया संक्षिप्त लफ़्ज़ मुसनद में हज़रत अली की अपनी रिवायत में भी आता है।

"जैसे जियोगे वैसे मरोगे" वाला लफ़्ज़ जाँची गई हदीस की किताबों में इसी रूप में नहीं मिला; इसका अर्थ मुस्लिम में जाबिर बिन अब्दुल्लाह से रिवायत की गई "हर बंदा उसी हाल में उठाया जाएगा, जिस हाल में उसकी मृत्यु हुई" हदीस से मेल खाता है।

चित्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से कोड द्वारा बनाए गए हैं; आवाज़ मूल ख़ुतबे की रिकॉर्डिंग है, AI की आवाज़ नहीं। रिकॉर्डिंग की शुरुआत के परिचय-अंश और अंत का अरबी ख़ुतबा-समापन वीडियो में शामिल नहीं किए गए हैं। निर्माण: MuM · Safcocuk.
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